“बस्ती पुलिस का खौफनाक चेहरा: हर्रैया थानाध्यक्ष की शह पर पत्रकार परिवार पर कातिलाना हमला, क्या हत्या के बाद जागेगा प्रशासन?”
"थानेदार साहब को भाया 'विटामिन-एम', खाकी की गोद में खेल रहे दबंग; बेबस पत्रकार अब खटखटाएगा मुख्यमंत्री का द्वार!"
अजीत मिश्रा (खोजी)
”हर्रैया में ‘जंगलराज’: बांके से हमले पर भी मौन रहे थानाध्यक्ष तहसीलदार सिंह, दबंग चौकीदार बना पुलिस का ‘खास मेहमान’!””SP यशवीर सिंह की साख पर बट्टा!
हर्रैया पुलिस की ‘कठपुतली’ कार्यशैली से पत्रकार त्रस्त, क्या होगी नकारा थानाध्यक्ष पर कार्रवाई?”
”खाकी की सरपरस्ती में दबंगई: हर्रैया थानेदार की मेहमान नवाजी में पल रहे अपराधी, पत्रकार पर जानलेवा हमला!”
दिनांक: 02 अप्रैल, 2026, बस्ती मंडल, उत्तर प्रदेश।
हर्रैया, बस्ती ।। खाकी की सरपरस्ती में ‘खूनी खेल’: हर्रैया थानाध्यक्ष की शह पर दबंगों का तांडव, क्या किसी बड़ी हत्या का इंतज़ार कर रही पुलिस?
बस्ती। जनपद के हर्रैया थाना क्षेत्र में कानून व्यवस्था दम तोड़ती नजर आ रही है। आरोप है कि थानाध्यक्ष तहसीलदार सिंह ‘विटामिन-एम’ के मोह में इस कदर अंधे हो चुके हैं कि उन्हें पीड़ित की सिसकियां सुनाई नहीं दे रही हैं। महादेवरी गांव के पत्रकार अनिल शुक्ल और उनके परिवार पर हुए जानलेवा हमले ने पुलिसिया इकबाल पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
चौकीदार की दबंगई और थानेदार की ‘मेहमान नवाजी’
हैरत की बात यह है कि जिस चौकीदार प्रमोद कुमार पर शांति व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी है, वही दबंगों का सारथी बना हुआ है। सूत्रों की मानें तो पुलिस प्रशासन हर्रैया इस कदर मेहरबान है कि कार्यवाही करने के बजाय थाने में उसकी ‘मेहमान नवाजी’ की जाती है। थानाध्यक्ष अपनी कार्यशैली से यह सिद्ध कर रहे हैं कि वह न्याय के रक्षक नहीं, बल्कि रसूखदारों की कठपुतली बन चुके हैं।
धारदार हथियार से हमला, फिर भी कार्रवाई शून्य
पीड़ित पत्रकार का आरोप है कि दबंगों ने धारदार बांका से उन पर प्राणघातक हमला किया। कल दोबारा हुए हमले के बाद जब पीड़ित न्याय की गुहार लेकर थाने पहुँचा, तो वहां ‘कार्रवाई शून्य’ रही।
दबाव की राजनीति: मामला पुराने चोरी और मारपीट के मुकदमे से जुड़ा है, जिसे वापस लेने के लिए विपक्षी लगातार जानलेवा दबाव बना रहे हैं।
साक्ष्यों की अनदेखी: दबंगों द्वारा बांस के बेड़े तोड़ने का फोटो वायरल होने के बावजूद पुलिस हाथ पर हाथ धरे बैठी है।
“ऐसा प्रतीत होता है कि थानाध्यक्ष तहसीलदार सिंह, पूर्व थानाध्यक्ष परशुरामपुर की तर्ज पर किसी बड़ी अनहोनी या हत्या का इंतजार कर रहे हैं। दबंगों पर कार्रवाई करने में पुलिस के हाथ कांप रहे हैं।” — पीड़ित पक्ष
SP यशवीर सिंह की चौखट पर न्याय की गुहार
हर्रैया पुलिस की कार्यप्रणाली से निराश होकर पीड़ित ने बस्ती के तेजतर्रार पुलिस अधीक्षक यशवीर सिंह के समक्ष पेश होकर न्याय की गुहार लगाई है। पीड़ित ने नशे और सत्ता के गुरूर में चूर थानाध्यक्ष और दबंग चौकीदार के विरुद्ध प्रार्थना पत्र देकर कठोर कार्यवाही की मांग की है।
मुख्यमंत्री के जनता दरबार की तैयारी
पीड़ित पत्रकार ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि स्थानीय स्तर पर उन्हें न्याय नहीं मिला और आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज नहीं हुआ, तो वह लखनऊ स्थित मुख्यमंत्री जनता दरबार में पेश होकर हर्रैया पुलिस की काली करतूतों का कच्चा चिट्ठा खोलेंगे।
सवाल यह उठता है कि क्या बस्ती पुलिस किसी पत्रकार की हत्या के बाद जागेगी? आखिर कब तक खाकी के संरक्षण में अपराधी फलते-फूलते रहेंगे?
रिपोर्ट: ब्यूरो कार्यालय, बस्ती।
















